प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साई ग्रुप के प्रमोटरों जयेश तन्ना, दीप तन्ना और विवेक जयेश तन्ना तथा ग्रुप से जुड़ी सात संस्थाओं के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। आरोपियों ने मुंबई में पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए फ्लैट और दुकान खरीदारों से जुटाई गई रकम 43.73 करोड़ रुपये निजी इस्तेमाल में प्रयोग किया।
ED ने 31 जुलाई को मुंबई की विशेष PMLA अदालत के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 और 70 के तहत यह शिकायत दाखिल की। अदालत ने सभी आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
यह मामला मुंबई पुलिस द्वारा जयेश तन्ना, उनके भाई दीप तन्ना और अन्य के खिलाफ दर्ज कई FIR से जुड़ा है। पुलिस मामलों के बाद ED ने 2024 में जांच शुरू की थी। इन 17 मामलों में से 14 में अब तक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
ED की जांच डी.एन. नगर, अंधेरी, कांदिवली और गोरेगांव में चल रही पुनर्विकास परियोजनाओं पर केंद्रित है। एजेंसी का आरोप है कि प्रमोटरों ने प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए फ्लैट और दुकान खरीदारों तथा निवेशकों से रकम जुटाई, लेकिन निर्माण कार्य से संबंधित नहीं होने वाले निजी लाभ और अन्य उद्देश्यों के लिए इन पैसों को डायवर्ट कर दिया। इसके चलते परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकीं और खरीदारों, मूल सोसायटी सदस्यों तथा निवेशकों को कुल 43.73 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जांच के दौरान मार्च 2025 में ED ने साई ग्रुप और उसके प्रमोटरों से जुड़े नौ परिसरों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी में संपत्तियों और उन लेन-देन से जुड़े दस्तावेज तथा वित्तीय रिकॉर्ड मिले, जिनका कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम से संबंध था।
इससे पहले ED ने तन्ना, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की 33.89 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। इनमें महाराष्ट्र के मुंबई और अहमदनगर में कृषि भूमि, आवासीय फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और एक बंगला शामिल थे।
बाद में इस जांच का दायरा विदेश तक पहुंच गया। जुलाई 2025 में ED ने ब्रिटेन में तन्ना के परिवार की एक जमीन और इमारत वाली संपत्ति को कुर्क किया। ED के अनुसार, यह संपत्ति 2017 में करीब 2.07 लाख पाउंड (उस समय की विनिमय दर के अनुसार लगभग 2.2 करोड़ रुपये) में खरीदी गई थी। आरोप है कि इसे फ्लैट खरीदारों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी कर हासिल की गई रकम को डायवर्ट करके खरीदा गया था। इस संपत्ति की कुर्की को Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) के तहत लागू कराने के लिए भेजा गया।
मूल मामलों में आरोप है कि खरीदारों से भारी रकम लेने के बावजूद उन्हें फ्लैटों का कब्जा नहीं दिया गया। बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष एक मामले में अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, एक खरीदार ने फ्लैट के लिए 3.33 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, लेकिन बाद में पता चला कि वही फ्लैट किसी अन्य संस्था को बेच दिया गया था। डेवलपर द्वारा बदले में दिया गया दूसरा फ्लैट भी बाद में गिरवी रखा हुआ पाया गया।
प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल किया जाना ED की जांच का ताजा चरण है। जांच की शुरुआत धोखाधड़ी और पुनर्विकास से संबंधित FIR से हुई थी, जिसके बाद कथित तौर पर रकम को डायवर्ट करने और उस रकम से हासिल की गई संपत्तियों का पता लगाने तक इसका दायरा बढ़ाया गया।
